Sunday, 10 March 2013

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सुदूर उस निस्तब्ध गगन में ,
देवता / उस स्वर्ग में / आज ,
आज भी / आनन्द निमग्न !
-----------------------------और शिव / उस कैलाश पर !
-----------कभी / श्मशान में धुनी रमाए!
-----------कभी / असुरों तक पे क्रपालु !
-------समुद्र - मंथन में / विषपान करते शिव !
--------------गंगा के हठ /पर नत  /पार्वति- पति !
----ओह----इतना लिखने पर भी / सारी बात दिल ही 
में है -------इससे तो बेहतर था --
--------------------------एक हाइकू लिख देती ! :)     

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