Sunday, 10 March 2013

अय / आसमां

ज़रा तो सब्र करे !

उस आसमां से ,
           कह दीजे साहिब !
ढेरों , चाँद- तारे - सूरज ,
              हैं , हमारी मुट्ठी में !
       बस , मिले जो फुरसत ,
ज़रा-सी , किसी तरह !
             सब टांक दूंगी , मै उस पर!
-------------------------- :)
---------------------डॉ . प्रतिभा स्वाति

8 comments:

  1. तू विराट इतनी की ,
    आसमा छोटा हो गया ,
    मिले फुरसत जरा-सी ,
    तो हाथ थामलो हमारा भी .

    ReplyDelete
  2. wlcm sr -----------abhi mae /blog ka satting hi samjh rahi hu :(

    ReplyDelete
  3. अच्छे से समझ लीजिये डॉक्टर साहिब

    ReplyDelete
  4. manoj / aapka mtlb samjh nahi aaya mujhe

    ReplyDelete